आज बिजली की बढ़ती कीमतों और बार-बार होने वाली बिजली कटौती के कारण लोग सोलर ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। किसी भी सोलर सिस्टम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा सोलर इन्वर्टर होता है। यदि आप अपने घर, दुकान या ऑफिस में सोलर सिस्टम लगाना चाहते हैं, तो सोलर इन्वर्टर के बारे में सही जानकारी होना बहुत जरूरी है। सोलर इन्वर्टर सोलर सिस्टम का आवश्यक उपकरण है क्योेंकि सोलर पैनल से प्राप्त DC Current को सीधे तौर पर उपयोग नही कर सकते हैं। सोलर इन्वर्टर एक ऐसा उपकरण है जो सोलर पैनल से प्राप्त डायरेक्ट करंट (DC) को अल्टरनेटिंग करंट (AC) में परिवर्तित करता है, जिसका उपयोग घरेलू और व्यावसायिक उपकरणों द्वारा किया जाता है। सोलर इन्वर्टर पूरे सोलर सिस्टम का मस्तिष्क कहा जाता है,क्योंकि सोलर इन्वर्टर अपने सेंसर की मदद से Heavy Load, Low Battery, Charging mode जैसे कई और फीचर्स को कंट्रोल करता है।
इस लेख में हम जानेंगे कि सोलर इन्वर्टर क्या होता है, यह कैसे काम करता है, इसके प्रकार, फायदे, तथा सही सोलर इन्वर्टर कैसे चुनें।
इस से पहले हमने अपने पिछले लेख मे Monocrystalline, Polycrystalline और Thin Film सोलर पैनल के बारे में बात की है उस लेख को यहाँ पर क्लिक कर के सोलर पैनल क्या है? पढ़ सकते हैं। इनके बारे में सरल भाषा में जानकारी दी है, जिससे आपको सोलर पैनलों की बुनियादी समझ विकसित करने में मदद मिलेगी।
सोलर इन्वर्टर एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जो सोलर पैनलों से प्राप्त DC (Direct Current) बिजली को AC (Alternating Current) बिजली में बदलता है। हमारे घरों में उपयोग होने वाले अधिकांश उपकरण जैसे पंखा, टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन और एयर कंडीशनर AC बिजली पर चलते हैं। इसलिए सोलर पैनलों से मिलने वाली बिजली का उपयोग करने के लिए इन्वर्टर आवश्यक होता है।
सोलर पैनल सूर्य की रोशनी से DC बिजली उत्पन्न करते हैं। यह बिजली सोलर इन्वर्टर तक पहुँचती है। इन्वर्टर इसे AC बिजली में बदल देता है, जिससे घर के उपकरण आसानी से चल सकें। यदि सिस्टम में बैटरी लगी है, तो अतिरिक्त बिजली बैटरी में स्टोर की जा सकती है और जरूरत पड़ने पर उपयोग की जा सकती है।
ऑफ-ग्रिड इन्वर्टर उन स्थानों के लिए उपयुक्त है जहाँ बिजली की आपूर्ति नियमित नहीं होती या फिर उन लोगोेें के लिए जो कि अपना बिजली का कनेक्शन कटवा कर पूरी तरह से सौर ऊर्जा से बिजली का उपयोग करना चाहते हैं इन परिस्थितियों में यह एक शानदार विकल्प है । यह बैटरी के साथ काम करता है और बिजली जाने पर भी घर के आवश्यक उपकरण चलाता है। अधिकांश आधुनिक ऑफ-ग्रिड इन्वर्टरों में बिल्ट-इन PWM (Pulse Width Modulation) या MPPT (Maximum Power Point Tracking) या चार्ज कंट्रोलर होता है, जो सोलर पैनलों से प्राप्त ऊर्जा का कुशलतापूर्वक प्रबंधन कर बैटरी को सुरक्षित और प्रभावी ढंग से चार्ज करता है। अगर आप 1KW से कम का इन्वर्टर चुन रहे हैं तो PWM टेक्नोलॉजी का ले सकते है। अगर आप का बजट अनुमति देता है, तो MPPT ही लें लेकिन 1KW से बड़ा ऑफ-ग्रिड सोलर इन्वर्टर लगाने का सोच रहे हैं, तो बेहतर प्रदर्शन, अधिक दक्षता और सोलर ऊर्जा के बेहतर उपयोग के लिए MPPT टेक्नोलॉजी वाले इन्वर्टर का चयन करना चाहिए। MPPT या PWM चार्ज कंट्रोलर के बारे में हम अगले लेख में पढ़ेंगे। दूर-दराज के गाँव , पहाड़़ी क्षेत्र, या खेतोें में बनें फार्म हाउस के लिए OFF-Grid सोलर इन्वर्टर लगातार बिजली के लिए एक अच्छा और Eco-Friendly विकल्प है।
ऑन-ग्रिड सोलर इन्वर्टर सीधे बिजली ग्रिड से जुड़ा होता है।ग्रिड (Grid) यानी बिजली विभाग की सप्लाई, जो आपके घर तक बिजली के तारों के माध्यम से पहुंचती है। इसमें बैटरी की आवश्यकता नहीं होती। सोलर पैनलों से उत्पन्न अतिरिक्त बिजली को यह बिजली ग्रिड (बिजली विभाग के नेटवर्क) में भेज सकता है। यदि आपके क्षेत्र में नेट मीटरिंग की सुविधा उपलब्ध है, तो आपके उपयोग के बाद बची अतिरिक्त सौर ऊर्जा का क्रेडिट आपके बिजली खाते में दर्ज किया जाता है। इससे आपका बिजली बिल कम हो सकता है। हालांकि, सुरक्षा कारणों से जब बिजली ग्रिड की सप्लाई बंद हो जाती है, तो अधिकांश ऑन-ग्रिड सोलर इन्वर्टर भी स्वतः काम करना बंद कर देते हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि बिजली लाइन पर काम कर रहे कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
जब बिजली ग्रिड (Grid) यानी बिजली विभाग की सप्लाई बंद हो जाती है, तो ऑन-ग्रिड सोलर इन्वर्टर भी सुरक्षा कारणों से सौर ऊर्जा से बिजली बनाना और घर को बिजली देना बंद कर देता है। चूंकि ऑन-ग्रिड सोलर इन्वर्टर में आमतौर पर बैटरी नहीं होती, इसलिए दिन के समय भी बिजली कटने के दौरान आप अपने घर के विद्युत उपकरणों का उपयोग नहीं कर सकते। ये उपकरण तभी दोबारा चलेंगे, जब बिजली विभाग की सप्लाई (ग्रिड) वापस आ जाएगी। ON-Grid सोलर इन्वर्टर मे बैटरी न होने के कारण इसे वो लोग नहीं लगवा सकते जो ऐसी जगहों पर रहते हैं जहाँ पर बिजली की बहुत ज्यादा कटौती होती है और उन्हें बैटरी से पावर बैकअप की जरुरत पड़ती है, या फिर ग्रिड से बिजली की सप्लाई ही नहीं है। जैसे- दूर-दराज के गाँव , पहाड़़ी क्षेत्र, या खेतोें में बनें फार्म हाउस के लिए ON-Grid सोलर इन्वर्टर की सलाह नहीं दी जाती है।
ध्यान दें: कई लोग सोचते हैं कि दिन में धूप होने पर ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम बिजली कटने के बावजूद चलता रहेगा। लेकिन ऐसा नहीं होता। सुरक्षा मानकों के अनुसार ग्रिड बंद होने पर ऑन-ग्रिड इन्वर्टर भी स्वतः बंद हो जाता है। इससे बिजली लाइनों पर काम कर रहे कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
हाइब्रिड इन्वर्टर, ऑफ-ग्रिड और ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम दोनों की सुविधाओं को एक साथ प्रदान करता है। यह सोलर पैनल, बैटरी और बिजली ग्रिड—तीनों के साथ काम करने में सक्षम होता है।
यदि आप सोलर पैनल से उत्पन्न बिजली का उपयोग अपने घर में करना चाहते हैं, अतिरिक्त बिजली को बिजली विभाग को सप्लाई करके अपने बिजली बिल में बचत करना चाहते हैं, और पावर कट के समय बैटरी बैकअप के माध्यम से घर में बिजली की सुविधा बनाए रखना चाहते हैं, तो हाइब्रिड सोलर इन्वर्टर आपके लिए एक बेहतर विकल्प हो सकता है।
यह सिस्टम ऊर्जा की बचत, बिजली की उपलब्धता और सोलर ऊर्जा के अधिकतम उपयोग में मदद करता है।
ध्यान दें: नेट मीटरिंग और बैटरी वाले Hybrid Solar Inverter से जुड़े नियम हर राज्य और बिजली वितरण कंपनी (DISCOM) में अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए Hybrid Solar Inverter लगवाने से पहले अपने राज्य और स्थानीय बिजली विभाग के वर्तमान नियमों की जानकारी जरूर लें। यदि आपके क्षेत्र में ऐसे सिस्टम की अनुमति नहीं है, तो अपनी जरूरत के अनुसार On-Grid या Off-Grid Solar Inverter का विकल्प चुना जा सकता है।
इसलिए, सोलर सिस्टम लगवाने से पहले अपने राज्य के नियमों और बिजली विभाग की गाइडलाइन की जानकारी जरूर लें। अपने घर, बिजली की खपत और भविष्य की जरूरतों के अनुसार सही सोलर सिस्टम चुनने के लिए किसी विश्वसनीय सोलर विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहेगा। सही जानकारी और उचित सिस्टम चयन के साथ आप सोलर ऊर्जा का लाभ उठाकर बिजली की बचत कर सकते हैं और ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
नोट:"ऊपर दिखाई गई इमेज AI द्वारा निर्मित है, इसमे गलती होने की संभावना है।"
सोलर इन्वर्टर चुनाव करने से पहले अपने घर पर लगे सारे विद्युत उपकरणों लोड क्षमता(Watt) कैलकुलेट करेें। आप के घर के कुल लोड की गणना करने के बाद ,यह निर्धारित करें कि एक समय में अधिकतम कितने उपकरण चल सकते हैं। अपने घर के कुल अधिकतम लोड से थोड़ी अधिक क्षमता वाला सोलर इन्वर्टर चुनें। इससे इन्वर्टर पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ेगा और भविष्य में कुछ अतिरिक्त उपकरण जोड़ने की गुंजाइश भी रहेगी।
ध्यान दें: फ्रिज, कूलर, पंप और AC जैसे उपकरणों में स्टार्टिंग के समय सामान्य से अधिक पावर की आवश्यकता हो सकती है। इसलिए इन्वर्टर चुनते समय केवल सामान्य लोड ही नहीं, बल्कि स्टार्टिंग/सर्ज लोड को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
अगर आपके यहाँ बिजली की कटौती न के बराबर है और बिजली के लिए बैटरी बैकअप की जरूरत नहीं है तो ON-Grid सोलर सिस्टम आप के लिए बहुत अच्छा विकल्प है इससे आप अपने बिजली के बिल मे भारी बचत कर सकते हैं। ON-Grid सोलर सिस्टम बैटरी न होने की कारण OFF-Grid सोलर सिस्टम व हाइब्रिड सोलर इन्वर्टर दोनों से सस्ता होता है।
अगर आप पूर्ण रुप से ग्रिड से बिजली का कनेक्शन कटवा कर बिजली के लिए पूरी तरह से आत्मनिर्भर होना चाहते हैं या फिर बहुत ज्यादा बिजली कटौती से परेशान हैं तो आप OFF-Grid सोलर इन्वर्टर आप के लिए एक शानदार विकल्प है।
अगर आप अपने बिजली के बिल को कम और बिजली कटौती के समय बैटरी से बिजली बैकअप लेना चाहते हैं तो निसंदेह होकर Hybrid Solar Inverter को लगवा सकते हैं। मगर ध्यान रहे कि Hybrid Solar Inverter की कीमत ON-Grid व OFF-Grid दोनों से काफी अधिक होती है।
सोलर इन्वर्टर काफी महंगे होते है और इनको हम बार-बार नहीं लगवाते हैेें, इसलिए सोलर इन्वर्टर का चयन अपने बजट और घर के उपकरणों के लोड को अच्छे से कैलकुलेट कर के ही करें।
नोट: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और शैक्षिक उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य किसी विशेष सोलर पैनल, ब्रांड, निर्माता या तकनीक की सिफारिश (Recommendation) करना नहीं है। सोलर सिस्टम खरीदने या किसी भी प्रकार का निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले अपनी आवश्यकता, बजट और स्थान के अनुसार किसी योग्य सोलर विशेषज्ञ या अधिकृत इंस्टॉलर से सलाह अवश्य लें।
उदाहरण के तौर पर मेरा फ्रिज जब मै on करता हूँ तो meter में लोड 500W दिखता है और थोड़ी देर बाद घटकर 100W के आसपास दिखने लगता है। इस स्थिति में 500W को फ्रिज का Starting Load या Surge Load और लगभग 100W को उसका Running Load कहा जा सकता है।